पूरी ज़ियारत काफी लंबी है, लेकिन इसके कुछ सबसे प्रमुख और दिल को झकझोर देने वाले हिस्से नीचे हिंदी (Hindi Transliteration) में दिए जा रहे हैं ताकि पढ़ने और याद करने में आसानी हो:
"सलाम हो तुम पर ऐ अबा-अब्दिल्लाह! सलाम हो उस बच्चे पर जिसे गोद में लेकर तुम शहीद हुए। सलाम हो उन ज़ख्मों पर जो तुम्हारे पाक जिस्म पर लगे।" ziyarat e nahiya in hindi
"सलाम हो हुसैन पर, जिन्होंने अपनी जान अल्लाह की राह में कुर्बान कर दी। सलाम हो उस मजलूम पर, जिसके सूखे गले पर खंजर चलाया गया। सलाम हो उस पर, जिसके कफ़न को भी लूट लिया गया..." ziyarat e nahiya in hindi
आजकल डिजिटल दौर में इस पवित्र ज़ियारत को पढ़ना और समझना बहुत आसान हो गया है। आप नीचे दिए गए साधनों का इस्तेमाल कर सकते हैं: ziyarat e nahiya in hindi
इसे बारहवें इमाम, इमाम मोहम्मद इब्न अल-हसन अल-महदी (अ.स.) द्वारा संकलित माना जाता है।
इमाम ज़माना (A.S.) इसमें इमाम हुसैन (A.S.) की प्यास, उनकी शहादत के वक़्त की ज़ख्मों, और उनके अहले-बैत (परिवार) की बेबसी का सजीव चित्रण करते हैं .